खाने पीने की वे चीजें जो शहवत पैदा करती हैं
हर व्यक्ति जीने के लिए खाना खाता है अच्छा स्वास्थ्य बनाने के लिए हर प्रकार की सवाधानी बरतता है। बीमारियों से बचने के लिए स्वस्थ रहने के लिए अच्छे अच्छे खाने खाता है। लेकिन वैवाहिक जीवन का सही आन्नद लेने के लिए ऐसी ताकत वाली चाजें खानी भी ज़रूरी हैं जो उसकी मर्दाना ताकत को बढ़ाती हैं जो इन्सान में शहवत पैदा करती हैं। हकीम बू अली सीना की किताबों से बहुत सी ऐसी खाने पीने की चीजें यहां दी जा रही हैं जो शहवत पैदा करने में बेमिसाल हैं-
स्पष्ट रहे कि मर्दाना ताक़त के लिए जवान मुर्गी का गोश्त जिसने अभी अंडे न दिए हों और उस मुर्ग का गोश्त जो अभी अज़ान न देता हो बड़ा ही लाभदायक है । मगर मुर्ग का गोशत मुर्गी के गोश्त से ज़्यादा अच्छा होता है । इनके गोश्त खाने का तरीका यह है कि इसके कबाब बनाए जाएं और गोश्त कूटते समय उसमें बहुत सा ज़ीरा व मसाला डाला जाए।
यदि किसी के मिज़ाज में खुश्की अधिक हो तो इसके गोश्त में प्याज़, जाफ़रान, दारचीनी, मुश्क गुलाब को डाले या यखनी में कनोतियां डलवाकर खाएं। यदि मिजाज़ ठीक हो तो चावलों के साथ पुलाव पका कर खांए । संभोग के लिए ज़्यादा आनन्द उठाने के लिए ताक़त देने वाला गोशत बछड़े का होता मगर बछड़ा अच्छा तैयार हो और खाने का तरीका सब से बेहतर है कि ताza गेंहू के साथ खिचड़ा बनवाकर खाया जाए। यदि इस खिचड़े में पानी के बदले गाय का दूध डाल दिया जाए तो इतना ताकत देने वाला बन जाता है कि इससे बेहतर कोई चीज़ नहीं होती ।
यदि हरीरा बनाना हो तो गेंहू के बदले चावल डाल दें और ज़ाफ़रान के साथ शकर ज्यादा मुफीद है यदि शकर के बदले शहद डालें तो और भी अच्छी ।चीज़ बन जाएगी। इसमें अखरोट की गिरियां, अनार दाना भी डाला जा सकता है
यदि bhesa के लिंग को बारीक पीस कर मुर्गी के अंडे की अध पकी ज़र्दी के साथ खाएं तो बड़ी ताकत हासिल हो । जो व्यक्ति हमेशा खाने की जगह चिड़ियों का गोशत खाए और पानी की जगह गाय का दूध पिए उसकी मनी कभी कम न होगी और तेज़ी व सख़्ती में भी कमी न आएगी। जब तक इस तरह के खाने की व्यवस्था रखेंगे तो संभोग में कभी कमी महसूस न होगी ।
यदि एक जवान मुर्ग मोटा ताज़ा लेकर दस अदद प्याज़, एक मुट्ठी कन्जुद मकशर के साथ इतना पकाएं कि सब कुछ गल कर एक जात बन जाए फिर उसे खाएं तो बड़ी अजीब सी ताकत पैदा हो जाएगी। यदि मुर्गी के तीन अंडे जो उसी दिन दिए हों लेकर उनकी सफेदी अलग करके देसी घी भर दें और ऊपर से हर अंडे में थोड़ा नमक और आधा दिरम तुखुम जर जीर छिड़क कर अध पका कर लें फिर सोते समय खा लें तो अच्छी भली ताकत आ जाए।
यदि सौ दिरम भेड़ के दूध में बीस दिरम शकर डाल कर जोश दें और इसमें एक कौड़ी भर मुश्क भी दाखिल कर दें और दो दिरम लौंग के चूर्ण के साथ खाएं तो लाभ पहुंचे। यदि किसी ताजा गोश्त को प्याज़ और उसकी समान मात्रा में कन्दुर और चौथाई हिस्सा शहद और थोड़ी ज़न्जबील और ज़ाफ़रान और तीस दिरम लिसानुल असाफीर के साथ पका कर खाएं तो बड़ा ही आनन्द आएगा। नरगिसी पुलाव और नरगिसी कोफ्ते खाने से बड़े भारी पैमाने पर तेजी व सख्ती पैदा होती है। पीने की चीजों में बेहतर यह है कि किसी मकवी शर्बत के साथ इस्तेमाल करें क्योंकि इसमें गाढ़ा पन होने के कारण अधिक ताकत होती है।
यदि शहवत की तेजी चाहते हैं तो मुर्गी के चूज़ों (छोटे बच्चों), चकोर, कबूतर, चिड़ियों और इसी प्रकार के जानवरों व परिन्दों का गोशत भी ज़रूरत के अनुसार खाया जा सकता है। इसी तरह फलों में अमरूद सेब के बीज निकाल कर खाए जाएं। इसके अलावा सूठं, खरफा, लौंग तेज पात, बड़ी इलायची दो दो मिश्काल खोलन्जान, मिसरी एक मिश्काल कबाब चीनी, पोस्त तुरन्ज, पोबालिंग, सुम्बुल हिन्दी, जायफल, जावितरी, पीपल, सौंफ मेथी पांच पांच मिश्काल इन दवाओं को कूट कर छान कर थेली में भर कर गोश्त और मेवों आदि के साथ देग में डाल दें। जोश आते समय थेली को बार बार मलते रहें कि सारा अर्क निकल आए। जब सारा गोश्त गल कर हलवा हो जाए तो देग़ को उतार लें। साफ करने के बाद इस पर पांच मन असली शहद डाल कर कवाम तैयार कर लें फिर उसमें रूमी मसतगी और अम्बर दस दस दिरम डाल दें । यदि क़वाम को अधिक गाढ़ा करना हो तो जोश देकर सौ मन को चालीस मन रखें और पतला रखना हो तो अस्सी मन रहने दें और सबके बाद मुश्क, जाफ़रान कुल दवाओं के मुकाबले एक एक सौवां हिस्सा गुलाब में मिला कर डालें और चीनी के बर्तन में रखें । चालीस दिन के बाद खाना शुरू करें।