माल कंगनी
हिन्दुस्तान के अनुभवी हकीम बयान करते हैं माल कंगनी को इस प्रकार खाना चाहिए कि पहले दिन एक दाना दूसरे दिन दो दाने और इसी तरह हर दिन बढ़ाता जाए। एक हफ्ते में दिल रोशन होगा। स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है। इस के इस्तेमाल से हर प्रकार के रोग दूर हो जाएंगे मगर खटाई. तेल मूली नींबू राई से और इसी प्रकार की चीजों का परहेज रखने और चार दिन तक संभोग न करे। यदि माल कंगनी का तेल तलवों में लगाया जाए तो आंख की रोशनी बढ़ेगी। यदि चांद की चौदहवीं तारीख को इतवार की रात में इसका तेल और इसका काजल निकाला जाए और आंख में लगा ले तो इसे कोई न देख सकेगा चाहे कहीं भी चला जाए। यदि सफ़र के महीने में बुद्ध के दिन इसका तेल निकाल कर कोढ़ के रोगी को खिलाएं तो वह ठीक हो जाएगा मगर बीस दिन तक खिलाया जाए और बदन पर भी मलें और संभोग से भी बचे रहें ।
यदि इसके साबुत दाने को गाए के घी में भून कर एक फंकी हर दिन खाए इतनी अधिक शहवत हो कि हर दिन दस औरतों की तसल्ली कर सकें। यदि माल कंगनी को काली गाय के दूध में जोश देकर दही जमाकर मसका निकाल कर आठ दिरहम शीर बरन्ज के साथ खाएं तो बाल काले हो जाएंगे और फिर सफ़ेद न होंगे । यदि माल कंगनी को मंगल की रात को गाय के दूध में भिगो कर चालीस दिन तक खाएं और संभोग न करें तो नामर्द भी मर्द हो जाएगा। यदि इसे ऊंट व गीदड़ के पेशाब में तर करके तीन दिन औरत को खिलाए तो उसकी शहवत रुक जाएगी और कोई मर्द उससे संभोग न कर सकेगा ।
यदि गूंगा व्यक्ति गाय के दस सेर दूध में एक सेर माल कंगनी को इतना पकाए कि तमाम दूध समा जाए। फिर सात दाने रोज बीस दिन तक खाएं और संभोग न करे तो बोलने लगेगा मुजर्रब है यदि इसका तेल इस जगह पर गर्म करके मलें जहां वायु रुकी हुई हो तो कुछ बार के इस्तेमाल से सेहत ठीक हो जाएगी
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