इन्सान का दुश्मन
इन्सान के पैदा होने से लेकर आज तक जिन्न भी इस धरती पर इन्सान के साथ आया है। हर पढ़ा लिखा, अक्लमन्द या जाहिल भी जिन्न की कल्पना से इन्कार नहीं कर सकता मतलब यह कि यह जिन्न भी अल्लाह की एक रचना है जो इस दुनिया की रचना के समय से मौजूद है दुनिया की किसी क़ौम ने भी इस आग से बनी मखलूक जिन्न का इन्कार नहीं किया। इन्होंने बड़े बड़े कारनामें, अक्ल में न आने वाली महान क्रान्तियां जौ इनके द्वारा घटी है इस महान जीव के होने का सबूत हैं। जिन्न जिसे हिन्दी वाले राक्षस के नाम से पुकारते हैं और हिन्दुओं के वेदों में इनका अधिकता से उल्लेख है मुख्य रूप से महा भारत में इस प्रकार की शक्तियों के प्रदर्शन का भी उल्लेख मौजूद है, स्वयं मुसलमानों की पाक किताब कुरआन शरीफ़ में इनका उल्लेख मौजूद है। ईसाई क़ौम भी इनकी इन्कारी नहीं है उनकी धार्मिक पुस्तक बाइबल में भी जिन्न कौम का
उल्लेख है। पारसी किताब में भी इस बारे में कई भजन मौजूद हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि जिन्न का इन्सानी अक्ल से संबंध कायम है और यही शक्ति "हमजाद" के नाम से भी प्रसिद्ध है। दुनिया के अधिक तर वासी इसके नाम से तो परिचित हैं लेकिन इसे बस में करने के तरीकों से ना वाकिफ हैं
